तुम्हारे किये का असर

तुम्हारे किए का असर कुछ इस तरह से है

मेरे गांव का मौसम जवां होता है मगर उसमें अल्हड़पन नहीं आता

सारे मौसम आते हैं मगर सावन नहीं आता।

छत पर रखे गमले के फूल अधखिले रह जाते हैं

न उन पर तितलियां बैठती हैं न ही भौंरे मंडराते हैं।

नीम के पेड़ में निमकौरियां नहीं रूकतीं

आम के पेड़ में अमियां नहीं रूकतीं

सरसों के फूल पीले नहीं पड़ते

बाजरे की फसल में बालियां नहीं रूकतीं।

ये झील ये झरने ये नदी ये सागर

ये कुएं ये पोखर ये नहरें ये गागर

ये सूखे हैं सारे ये प्यासे हैं सारे

तुम्हारे किए का असर कुछ इस तरह से है।