बेरोजगारी

बेरोजगारी छीन लेती है
‎ आने वाली पीढ़ी के सपने
‎ बेरोजगार छीन लेती हैं उम्र
‎ बेरोजगार छीन लेती है खुशियां
‎बेरोजगारी छीन लेती है समाज मे बोलने का हक
‎ बेरोजगारी छीन लेती है  परिवार से जुडे़ फैसले  लेने का अधिकार
‎  सिर्फ  देती है
‎बेरोजगारी समाज से ताने
‎हर कोई उसे शर्मिंदा करता है
‎हर कोई उसे नीचे गिराता है
‎क्योंकि
‎बेरोजगारी उसके जीवन की कहानी बन जाती है
‎  ऐसी बेरोजगारी जो
‎ना जीने देती है 
‎ना मरने देती है
‎ बस एक सवाल मन में खड़ा  करती है
‎ क्या कर रहा है आजकल
‎खुब पढा खुब लिखा
‎ पर बेरोजगारी मिटाने  के लिए नही लड़ सका
‎  छोड़ कर आया गांव की चौखट भला
‎ पर शहर मे भी  कुछ ना कर सका
‎ ऐसी बेरोजगारी
‎ जो बिन अपराध देती है
‎हर दिन सजा वो
‎क्योंकि
‎बेरोजगारी  से भरा पड़ा वो
‎ हर पल वह चिंतित रहता है
‎मांग रहा है
‎अब वह बेरोजगारी से  ही
‎ रोजगार अपना
‎पर कौन दे यह हक भला
‎जो मिटा सके बेरोजगारी उसकी
‎ आने वाली पीढ़ी के सपने  सवार सके
‎फिर से लौटा सके  वो गुजरी हुई उम्र
‎फिर से लौटा सके वो खुशियां
‎ दिला सके  समाज  में उसे फिर से वही सम्मान
‎   ऐसी होती है बेरोजगारी जो छीन लेती सारी
‎    जिंदगी
__________✍️S.m