गर मैं तुम होता

गर मैं फूल होता तुम मेरा बिखरना देख पाते,
गर मैं बादल होता तुम मेरा बरसना देख पाते,
गर मैं आब होता तुम मेरी गहराई देख पाते,
गर मैं रुत होता तुम मेरी पतझड़ देख पाते,
गर मैं शायर होता तुम मेरा इश्क़ देख पाते,
गर मैं कागज होता ना कह सका वो दर्द देख पाते,
गर मैं ख्वाब होता तुम आंसुओं में खुद को देख पाते,
गर मैं तुम होता तुम मुझमे पूरी कायनात देख पाते।

                                     _Shakti Singh