"मैं भी शायर हूं"
गर्दिश में जरूर हूं,
लोगों से बहुत दूर हूं,
हर तरह से मजबूर हूं,
किसी को पाने की चाह में चूर हूं,
वह मेरा है, मैं उसका गुरुर हूं,
उसको चाहने की खातिर,
उसी से कोसों दूर हूं,
उसको बताओ मैं जो भी हूं,
बदगुमा हूं मैं, चाहे बेज़ुबा हूं,
वह ग़ज़ल समझती है खुद को,
तो उम्दा नहीं, ख़ैर मैं भी शायर हूं,
वो चोरी से देखे, या भरी महफ़िल में ताना दे,
वो ना भी देखे मुझको,
मैं तो फिर भी का़यल हूं,
उनको फिर बताओ यारो,
मेरा ता़रुफ कराओ यारो,
वो नूर समझती हो खुद को,
या हूर समझती हो,
वह मेरी आवाज दिल की है,
मैं उसका महबूब आला हूं।
_Nikhat Bano
