दुनिया की नज़र से मिला,समझ आया हर दिल का गिला।अक्सर मिलने-जुलने की बातें,नींद चुरा लेती हैं रातें।किया तुम्हारे ख़यालों का ज़िक्र,पर न जागी तुम्हें मेरी फ़िक्र ।
—ALAN SHEIZ