शेर लिख रहा हूं
अपनी हालत पर शेर लिख रहा हूं…
मैं जिंदगी की बात पर शेर लिख रहा हूं…
घड़ी का वक्त बदल गया है मेरे…
मैं बेबस जज़्बात पर शेर लिख रहा हूं…
लहजा यूं ही नहीं बदल रहा हैं मेरा…
मैं लोगों के साथ पर शेर लिख रहा हूं…
हक़ीक़त हैं कि ज़रा देर कर दी मैंने…
मैं सबकी औक़ात पर शेर लिख रहा हूं…
हूं जानता कि नहीं आयेगा ये कल…
मैं गुजरते हुए आज पर शेर लिख रहा हूं…
ये ज़ख्म किसी की लगाई आग हैं मुझमें…
मैं जले हुए हाथ पर शेर लिख रहा हूं…
_वैभव..
