"अनकहा एहसास"

ना कोई किस्सा, ना कोई कहानी

तो जिक्र किस का करूँ ?

जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं

मै उसकी सिकायत किससे करूँ?

वो लम्हा जो मेरे अन्दर ही 

दफन हो कर रह गया,

मै उसकी फरियाद कैसे करूँ ?

कोई बात होती, तो कुछ बताता

जिसमे कोई बात ही नहीं, मै उसकी बात क्या करूँ?

जान लेते ”तुम” अगर ”मै ” होते ,

जिसे मै आज तक खुद नहीं समझ पाया ,

उसे मै तुम्हारे आगे पेश  कैसे करूँ ?

                                          _साक्षी