मुझे क्या चाहिए
नहीं चाहिए मुझे कोई गहना,
तुम बस अपना कांधा मुझे दे देना,
सिर रखकर जिस पर,
सारे गम भुला सकूं मैं
कुछ पलों के लिए।
फूल भी मत लाना तुम मेरे लिए,
तुम लाना साथ समय,
अपनी एक दुनियाँ गढ़ सकूं
संग बैठकर तुम्हारे जिसमें।
न कोई साड़ी, न गजरा
और न ही कोई सामान चाहिए,
मुझे तुमसे बस तुम्हारा साथ
और सम्मान चाहिए।
मत देना मुझे तुम कोई तोहफ़ा,
अपनी मर्ज़ी से
जी सकूं अपनी ज़िन्दगी,
मुझे बस इतना अधिकार चाहिए।
तुम रहना साथ मेरे
ताकत मेरी बनकर,
मत बनना पैरों की बेड़ी
मत रखना मेरे पंख जकड़ कर,
मुझे उड़ने के लिए
बस मेरा आसमान चाहिए।
मत छुपने देना वजूद मेरा
अपनी परछाई में,
तुम देना साथ मेरा
जीवन की हर कठिनाई में,
जब भी डगमगाएं कदम मेरे
तुम बनना मेरा साहस,
मुझे तुमसे इसके सिवा
न कभी कुछ और चाहिए।
_Bhawna Girdhar
