प्यार या दोस्ती?
मुझसे प्यार है तुम्हे ये बात कहाँ तक छुपाओगे।।
कब तक हम सिर्फ दोस्त है इन बातों से खुद को समझाओगे।।
अगर प्यार करते हो तो बोल दो ना
अपने दिल तक का रास्ता खोल दो ना।।
खुद न सही पर तुम्हे खुश रखुंगा।।
क्या इस प्यार का इजहार कभी कर पाओगे
कब तक हम सिर्फ दोस्त है इन बातों से खुद को समझाओगे।।
थोड़े से प्यार को फील तो कराओ
थोड़ी सी मुस्कुराहट मुझे तो दिखाओ।।
इन सबकी बातों को इतना क्यों सोचते हो
ये तो पीछे ही रहेंगे तुम जहाँ भी जाओगे
कब तक हम सिर्फ दोस्त है इन बातों से खुद को समझाओगे।।
मिले हो जब से बस बातें ही तो करते हैं
तेरी यादों में दिन को रातें ही तो करते हैं
कब मेरी खुद से मुलाक़ात करवाओगे
कब तक हम सिर्फ दोस्त है इन बातों से खुद को समझाओगे।
तुम मिले थे तो लगा मुझे रब मिल गयाll
एक इंसान जिसमें मुझे सब मिल गयाll
इस बेजान से दिल को कब तक दुखाओगेll
कब तक हम सिर्फ दोस्त है इन बातों से खुद को समझाओगेll
आरज़ू थी जिसकी वो इंसान हो तुम
चलो कहीं दूर हो जाये कहीं गुम
इंतज़ार है मुझे जब तुम मेरे सर को सेहलाओगे
कब तक हम सिर्फ दोस्त है इन बातों से खुद को समझाओगे
अभी तो बस मुलाक़ात हुई है मिलना अभी बाकी है
जो सबसे छुपाई वो बातें भी तुझसे बयाँ की है..
खुद के पास आने का इंतज़ार कब तक करवाओगे
कब तक हम सिर्फ दोस्त है इन बातों से खुद को समझाओगे..
जिस्म है ये साँसे कहाँ है
हँसी है सिर्फ खुशियाँ कहाँ है
कब तक मुझे अपना गुस्सा दिखाओगे
कब तक हम सिर्फ दोस्त है इन बातों से खुद को समझाओगे..
यादें शायद तुम्हारी तब तक रहेंगी
मेरे अंदर साँसे जब तक रहेंगी
कब तक ऐसे मुझे जिंदा रख पाओगे
कब तक हम सिर्फ दोस्त हैं इन बातों से खुद को समझाओगे..
हमेशा कॉल आता था तुम्हारी
घंटो बातें चलती थी हमारी
कब तक मेरे कॉल आने पर खुद को बिजी बताओगे
कब तक हम सिर्फ दोस्त है इन बातों से खुद को समझाओगे..
काश ऐसा हो कभी तुम मुझे कॉल लगाओ
तुम सिर्फ मेरे रहोगे ये बातें मुझे बताओ
मुझे अपने पीछे और कितना भगाओगे
कब तक हम सिर्फ दोस्त है इन बातों से खुद को समझाओग!
~PRANSHU PARASHAR
