भारत के राज्यों में होली के विभिन्न नाम

काव्यकुंज
भारत के राज्यों में होली के विभिन्न नाम

‘विभिन्नता में एकता’ की भव्य संस्कृति में सुशोभित मेरा भारत महान है।

भारत के भिन्न-भिन्न राज्यों में विभिन्न नाम से अलंकृत होली त्यौहार की अनूठी शान है।

गुजरात की होली-धुलेटी में प्रभुभक्ति के श्रद्धामय निर्मल रंगों की बौछार है।

राजस्थान की धूलंडी होली में अबीर-गुलाल की भावनात्मक भव्यता का यशोगान है।

महाराष्ट्र की रंगपंचमी-शिमगा होली में प्रकृति एवं किसान का आदरभाव है।

मध्यप्रदेश की रंगपंचमी-भगोरिया होली में मौसम के नवीनीकरण का संचार है।

उत्तरप्रदेश की लट्ठमार होली में महिला शक्ति के विजयोत्सव का आनंद है।

बिहार की फगुआ-फाग होली में रंगों एवं प्रारंपरिक संगीत का प्राधान्य है।

पंजाब की होला-मोहल्ला में शौर्य-वीरता का सांस्कृतिक-सामाजिक निर्वहन है।

हरियाणा की दुलंडी-धुलंडी होली में सामाजिक एकता का अनुपम संदेश है।

तमिलनाडु की कमान पंडिगई-कामा दाहानाम होली में कामदेव का स्मरणभाव है।

असम के दोल उत्सव-देउल होली में अद्वितीय आराधना का हर्षोल्लास है।

केरल की मंजुल कुली-उक्कली होली में जन जन मुख पर हल्दी लेप का सम्मान है।

ओड़िशा की डोला पुर्णिमा-जात्रा होली में राघा- कृष्ण के प्रेम का समर्पणभाव है।

कर्नाटक की कामना हब्बा होली में कामदेव के बलिदान का कथानक है।

आंध्रप्रदेश की मेदुरु होली में आध्यात्मिक नगरयात्रा का अलबेला उत्सव है।

तेलंगाना की धुलेंडी-धुरड्डी होली में सौहार्दपूर्ण शुद्धता का खुशहाल वातावरण है।

झारखंड की फगुआ होली में सेमल डाली की राख से तिलक लगाने का रिवाज है ।

सिक्किम की धुलेटी-होली में बुराई पर अच्छाई की जीत का मुकम्मल विश्वास है।

मणिपुर की याओशांग होली में सामुदायिक प्रेमभक्ति की दिव्य अभिव्यक्ति है।

पश्चिम बंगाल की डोल जात्रा-डोल उत्सव में राधा- कृष्ण के प्रेम का प्रतिबिंब है।

हिमाचलप्रदेश की फागली-सागला होली में ऊर्जावान भक्तिरस के दर्शन है।

उत्तराखंड की कुमाऊंनी होली में सामूहिक अनुष्ठान-पर्यावरण का प्रभाव है।

स्नेह-सद्भाव-समरसतापूर्ण होली उत्सव की खुशियों में महकता हिंदुस्तान है।

                                                                              -कादरभाई एन. मनसुरी