सूना कपाल

रूठकर तुम चल दिए अंजान सफर पर

क्या तुम्हें साथ चलना मेरे गवारा न था

यकीन था मुझे तेरे किए हुए  वादों पर

हवाले की थी तुझे पतवार किश्ती की  मेरी

गुम हो गए सब रास्ते रहबर जिनके तुम थे

जिंदगी थम गई है अंधेरी सर्द सुरंग में

मोहलत देती अगर मौत रहम करके

फरियाद मैं भी कर लेती तुमसे जुदाई की

खुशनुमा शामें बदल गई अमावस की रातों में

सलवटें बिस्तर की गवाह हैं करवटों की

सहर आती नहीं नजर तन्हा उदास रातों की

किश्ती होश की डूब गई अश्क के समंदर में

आंखों में जलन है आहों की तपिश की

दबी दबी सिसकियां रिसती हैं अब सांस से

मुस्कराहट याद आती है तो भूली हुई कहानी सी

मुरझाया फूल नजर आता है बेनूर चेहरा

उम्र बढ़ा गई है सालों आगे जुदाई तेरी

मिजाज गुलों के बदल गए हैं खारों से

कूच कर जाते हैं सभी इस फानी दुनिया से

तरीका जाने का जल्दी तुमने अनोखा चुना है

तलाशता है हर शख्स अब कपाल पर निशान

जैसे देखते हों मिल्कियत पर मालिक का नाम

बेकरार हैं जमा सियार हर तरफ अजीज के

बांटकर खाने को हैं तैयार मेरी जिंदा लाश

चुभती है हर बदनीयत नजर खंजर सी बदन में

शिकार आसान लगती है जवां बेवा हर मर्द को

नजर लगी है सब की अपनी मतलब की चीज पर

सैयाद हैं तैयार फैलाए जाल हसीन वादों का

नजर रखे हैं कोई बची खुरची दौलत पर मेरी

और कोई मुन्तजिर है मेरे उजड़े शबाब का

बेटी निभा रही है सहेली का किरदार

वजूद उलझा हुआ है मेरा बदनसीबी के जाल में

उम्मीद जगाती रहती है हर वक्त गमगीन दिल को

हो सकेंगे न रूबरू ख्वाब में दीदार हो जाए

बदर कर दिया है मुझे अब हर शुभ काम से

हर चीज दूर रखते हैं मेरे मनहूस साए से

अछूत हूं अब मैं हर मजहबी तमाशों में

बुलाता नहीं कोई मुझे अब अगली कतारों में

कोसने लगती हैं मुझे  सब  अब हर बात में

गाहे ब गाहे कोई मर्द पूछ ले गर हाल मेरा

देखते हैं मुझे हिकारत से अब रंगीन लिबास

रची बसी हैं कहानियां कितनी उनसे जुड़ी हुई

उदासी की गर्द गहनों कपडो पर छाई है

बेताब रहते थे कभी हुस्न को मेरे सजाने में

शोर करते थे पहनाती हार बांहों का सनम को

खामोश है वो पड़े दाग कंगन के हाथों में

गूंजती है कानों में अब भी खनक चूड़ियों की

कसक नहीं जाती पाजेब की तन्हा पैरो से

निकल जाते हैं राहगीर मुंह बिगाड़ कर

सामने आने पर मेरे राह से गुजरते हुए

आज का दिन अब अच्छा क्या जाएगा

जब देखा हो सुबह चेहरा एक बेवा का

बेहिसाब दौलत हैं यादें मेरी खुशहाल जिंदगी की

कट जाएगी जिंदगी बाकी इनको खर्च करते

दिल से गुजरे ख्याल भी अब आहिस्ता से

अभी अभी लगी है आंख दर्द की रोते रोते

नहीं करूंगी तामीर अब मैं नई इमारत

टूटे हुए ख्वाबों के बिस्मार मकबरे पर

बसर करूंगी जिंदगी बाकी सजदे में उसके

सीने में दफन नाकाम उम्मीदों की लाशों पर

 

विजय कुमार ‘ नाकाम ‘