क्या बतलाऊ तुझे ??

मेरे लिए तेरा होना कितना लाज़मी हैं …
लाज़मी जैसे वृक्ष को जल
थलचर को थल
और सिंह को बल
क्या बतलाऊ तुझे?
मेरा सहारा है तू
मेरी कश्ति का किनारा है तू
मेरे इस नीले आसमां का सितारा है तू …
क्या बतलाऊ तुझे?
मेरी ज़िंदगी का आधार तू
मेरी इस खाली – खाली जिंदगी की बहार तू
मेरे तिम भरे जीवन का आफताब है तू …
क्या बतलाऊ तुझे ?
तु मेरा भूतकाल, मेरा कल है
तु मेरी राह और मंज़िल है …
लबों पर और शब्द नहीं है अब
बया भी करूं तो क्या करूं?
तु मेरा मुकद्दर
तू मेरी हर परेशानी का हल है …
                      – Mehak