मेरी ख़ुशी मेरे अपनों से ,
मेरे गम मेरी सांसों से ,
खिल जाये ये असमान
जब साथ हो अपने हमारे ,
बरस जाये बिन मौसम ,
जब अपनो से ही दिल हरे हम !
टूटा है दिल फिर भी इश्क है उनसे ,
दुबियाँ अधूरी लगती बिन उनके ,
खुशियों के सौदागर वही !
-Silent Thoughts