प्रेम : एक अद्रश्य शक्ति

प्रेम गुलाब नहीं
जो दो पल में मुरझा जाए,
प्रेम वह गुरुत्व है
जो हर दिल को खींच लाए।
न इसका कोई रंग है,
न इसका कोई आकार,
फिर भी इसके आगे
झुकता है सारा संसार।
जैसे धरती खींचे सबको
अपने शांत आकर्षण से,
वैसे ही दिल जुड़ जाते
प्रेम के छोटे स्पंदन से।
प्रेम ऑक्सीजन जैसा है,
जो दिखता तो कहीं नहीं,
पर उसके बिना ये जीवन
चल सकता भी कहीं नहीं।
जब सूरज हर सुबह
बिन माँगे रोशनी देता है,
तभी तो अंधेरों से लड़ने का
साहस हर दिल लेता है।
प्रेम समय की तरह है,
रुकता कभी नहीं,
धीरे-धीरे बहता रहता
थकता कभी नहीं।
न इसका कोई बाज़ार,
न इसकी कोई कीमत,
फिर भी यही सबसे बड़ा
मानव जीवन का नीमत।
और शायद यही कारण है
कि दुनिया अब तक चल रही है,
क्योंकि हर दिल के भीतर
प्रेम की नदी पल रही है।

    -Pragti Sharma