तेरा प्यार, मेरा इश्क़

मैं आज भी यहीं हूँ,
खुद को टुकड़ों में तोड़ती हुई,
कि शायद वही इश्क़ लौट आए
और मुझे फिर से जोड़ दे।

ऐसा जोड़े
कि मुझमें बस मैं रह जाऊँ।

पर तेरा प्यार वहम है,
और मेरा इश्क़ अनंत।

तेरी दीद के लिए ही
तो बनी हैं ये आँखें,
बाक़ी तो ये दुनिया
सिर्फ़ एक जाल है
जो मुझे तुझसे दूर करने को बिछा है।

तेरी यादों के सिवा
है ही क्या मेरा?

और अगर वो भी न रहें,
तो क्या काम है मेरा
तुझे सोचूँ, तुझे देखूँ,
और लिखूँ भी तुझे ही।

यही तो सपना है मेरा।

पर..
तेरा प्यार वहम है,
मेरा इश्क़ अनंत।

ये वक़्त भी
मेरे प्यार का दुश्मन है,
कि तेरे पास बैठते ही
इसे भी जलन होने लगती है।

इसे गुज़र जाने दो, तुम ठहरो अभी,
साँसें ही कितनी हैं मेरे पास।

ये तेरा प्यार एक क़ैद है,
न रोने देता है, न हँसने देता है।

पर इस क़ैद से भी
हमें प्यार है।

मेरा इश्क़ अनंत है,
और तेरा प्यार वहम।

पर इस वहम से भी
हमें मोहब्बत है।

आख़िर चाँद
हर किसी को
कहाँ मिलता है।

मैं ढूँढूँ तुम्हें,
मंदिरों में,
मस्जिदों में।

पर गिड़गिड़ाने से
भीख मिलती है,
मोहब्बत नहीं।

तुम मिल जाओ,
ऐसा कैसे होगा?

क्योंकि तुम्हारा प्यार
तो वहम है, प्रिय…

और मेरा इश्क़ अनंत।

                     -Babita