बचपन की ख्वाहिश.

मम्मी के संग मेला जाऊंगा, वहा से पक्के आम लाऊंगा। दादा के संग कुर्सी पर बैठ, बड़े चाव से खाऊंगा।।

खाकर आम फिर गुठली को, मिट्टी खन-खन दफनाऊंगा। सूरज आया, बादल आया, संग में अपने अपने । धूप लाया, पानी लाया।।

धीरे- धीरे गुठली में फिर, एक नन्हा पौधा निकल आया।। देखत-देखत वो बड़ा वृक्ष बन जायेगा, ये पेड़ हमने है लगाया, ये बोल बोल इठलाऊंगा ।।

खेलूंगा उसकी डाली पर कूद कूद थक जाऊ तो उसी के छाव में, आराम फरमाऊंगा।।

आएगा वसंत जब, पेड़ में फूल लग जायेंगे।

हो जाए जब उसमे कच्चे फल, नमक मिर्च संग चोरी चोरी खाऊंगा।।

खाऊंगा मिल बाट कर, जब खट्टे फल पकजाएंगे।

हम सब मिलकर, हर पल प्रकृक्ति के गुण गायेंगे।।

                                      -Gitanjli kumari