दीवार नहीं हूँ मैं
कहानी है भले मेरी कोई किरदार नहीं हूँ मैं ,
जरा मायूस है ये मन कोई बीमार नहीं हूँ मैं ,
तुम्हें ग़र है फ़िकर सबकी तो कब मैंने तुम्हें रोका …..
किसी की राह में आऊं कोई “दीवार” नहीं हूँ मैं !!
कोई खंजर नहीं हूँ मैं कोई तलवार नहीं हूँ मैं ,
चलो अब मान भी लो तुम तुम्हे स्वीकार नहीं हूँ मैं
हक़ीकत से मैं वाकिफ़ हूँ नहीं कुछ भी छिपा मुझसे …..
मग़र सब बैठ के देखूँ कोई “दरबार” नहीं हूँ मैं !!
-Anchal Gupta
