एक शायराना प्रपोज़ल

In English we say: ” will you marry me?”

But in poetry I asked:

मेरे ख्वाबों में एक ताज है ,

तुम मुमताज बनोगी क्या ?

मैंने कुछ अल्फाज़ लिखे है दिल से ,

तुम आवाज बनोगी क्या ?

हर नमाज़ हर सजदे में मेरे ,

दुओं की इनायत बनोगी क्या ?

जो चुप्पी – है इन लब्जों के पीच्छे,

वो लिखावट बनोगी क्या ?

कभी मांगी थी खुदा से ,

वो मन्नत बनोगी क्या ?

मेरे ख्वाब बड़ी दूर के हैं ,

मेरे बच्चों की जन्नत बनोगी क्या ?

            _Shuraim Siddique