फासले प्यार के

मिलना तो हम भी चाहते है प्रिये ,

पर जिम्मेदारियों से है बंधे हुए ,

चाहते है बातें करना तीनो पहेर ,

रोक सके ना हमे समय की कोई लहेर,

आप हमारे हो और हमारे ही रहेगे ,

चाहे हमसे पास या हमसे दूर रहेगें ,

सपनो की नौका में स्वर हूँ मै ,

जिम्मेदारियों के बोझ बांध लिए ,

चले ढूँढने कमियाबी का शिखर, शिखर की तलाश में भूल हुई ,

मेरी हकीकत तो पीछे छूट गई ,

चला था दुनिया हांसिल करने ,

पर मेरी दुनिया तो मुझसे रूठ गई ,

समय का कैसा फेरा है उजाला होकर भी घना  अँधेरा है ,

अँधेरे मै झांक देखा ,प्यार हमारा गहेरा है,

दूर रहकर भी पास है ,

इस वक्त की लकीरों से बंधे हुए ! 

            -Siddharth Gawari