काश मैं उसकी राधा बन पाती,

काश दूर उससे रहकर भी हमेशा उसके दिल में रह पाती।
बंधन न होता विवाह का उससे, लेकिन कभी बिछड़ भी न जाती।
कोई भी आए जीवन में उसके, मैं अपना स्थान न खोती।
हर रासलीला में उसकी रानी होती,
काश मैं उसकी राधा बन पाती।
मुझे छोड़कर वो किसी और के लिए बांसुरी न बजाता,
मेरे बिना उसका वृंदावन भी सूना रह जाता।
उससे पहले मेरे सिवा किसी और का नाम भी न आता।
हर रासलीला में उसकी रानी होती,
काश मैं उसकी राधा बन पाती।
चोट मुझे लगती तो दर्द उसे होता,
कभी मैं रूठ जाऊँ तो वो दौड़ा आता।
मैं गोपियों से जलने लगूँ तो सबमें राधा का रूप दिखा जाता।
मैं अगर सब भूल भी जाती तो वो मुझे फिर से प्रेम सिखा जाता।
हर रासलीला में उसकी रानी होती,
काश मैं उसकी राधा बन पाती।
उपहार में अपनी बांसुरी दे जाता,
मेरे क्रोध पर चरणों में झुककर मनाता।
मेरे नाम से ही अपना हर गीत सजाता।
हर रासलीला में उसकी रानी होती,
काश मैं उसकी राधा बन पाती।
मैं उसके लिए सबसे अलग होती,
उसके हृदय में एकमात्र रानी होती।
उसकी सबसे प्रिय शक्ति होती,
उसकी बांसुरी की मधुर धुन होती।
हर रासलीला में उसकी रानी होती,
काश मैं उसकी राधा बन पाती।
प्रेम भी उससे राधा सा कर पाती,
हर जनम बस उसी की हो जाती।
हर रासलीला में उसकी रानी होती,
काश मैं उसकी राधा बन पाती।

                -Nirali Bangale