किसकी प्रतीक्षा में,,,
क्या
खोजता रहूंगा यूं ही स्वयं को
नियति के लिखे किरदारों में ,
या फिर
भटकता फिरूंगा इधर-उधर
पाने को
हमारी प्रार्थनाओं का ईश्वर ,
कोई तो बताए
जानें किसकी प्रतीक्षा में मैं
उस एक मृत्यु से पहले
कितनी ही मृत्युओं को जीता रहा
और लिखता रहा स्वयं को
कोई किस्सा समझकर,,
पूछता रहा
दिशाओं से अपना परिचय,
बांटता रहा नित रोज सांत्वनाएं
अपनी ही परछाइयों को ,
लेकिन
हर बार वापस लौटा
एक और यक्ष प्रश्न के साथ ,
क्या मैं वही हूं
जो समय की धूल में बार-बार
बनता-बिगड़ता रहा ,
या वह
जो हर क्षण मिटकर भी
किसी नये में जन्म लेता रहा ,,
यदि नियति ने रचा है मुझको
तो शायद
छोड़े होंगे उसने कुछ रिक्त स्थान
मेरे लिए भी कहीं ,
जहां से भर सकूं स्वयं को
धीरे-धीरे ,, धीरे-धीरे !!
नमिता गुप्ता “मनसी”
मेरठ, उत्तर प्रदेश !
_नमिता गुप्ता ‘मनसी’
