मै क्यों लिखता हु

मैं क्यों लिखता हूं?

मैं लिखता हूं, मन की बातें शब्दो में भर कर भावो से
और जाना चाहता इसके ज़रिए इन बस चलने वाली नावों से,
इन चपल, चलल, अस्थिर दृश्य में, कुछ है जो गतिमान नही,
रुकना चाहूं, पर बहता जाता, पर क्यों? इसका अनुमान नहीं,
नयनों से देखी, लहरों को स्याही के बल पर हटा रहा,
दुनिया और अपने में रिश्ते, कल्पनाओं से मिटा रहा,

कल्पनाओं की चप्पू द्वारा, मैं रोज घूमने चलता हूं, जीवन नैया से दूर चलूं,
इसी लिए मै लिखता हूं।

                                           _Nitin