पहली मुलाक़ात

एक प्यार की कहानी बनानी नहीं,
बननी है मुझे।
आज खुद से महोब्बत करनी है मुझे।

एक शाम ऐसी खरीदनी है, जो खुद पर पूरी खर्च करनी है,
किसी बगीचे में बैठ, एक छोटी मुलाक़ात आज दिल से करनी है।

उसे फूलों का महकता गुलदस्ता देना है,
हाथ उससे मिलाकर, वह पहली मुलाक़ात सा थोड़ा शर्माना है,
इस ठंडी हवा का सुकून लेते लेते, उसका हाल चाल पूछना है मुझे,

मैं बयां करूंगी इस दुनिया की खुदगर्ज़िया,
वह मुझे सुनाएगा मेरे ही अस्तित्व की खूबसूरत कहानियां,

और बातों ही बातों में, यूँही यह हसीन शाम ढल जाएगी,
जब लौटने का वक़्त आएगा,
तब उसकी यादें यह एहसास करवाएगी,
की
यह दिल…
यह दिल तो सदियों से इसी मुलाक़ात के इंतजार में बैठा था,
और मैं,
न जाने कहा भटकती रही, यह समझकर कि यह दिल तो किसी और का था।

                                                                            _Prapti Shah