प्यार के सात रंग
पहला रंग – एक माँ का प्यार
जिसमे खुद के लिए कुछ नहीं है,
लेकिन सब हमारे लिए है।
दूसरा रंग – एक पिता का प्यार
कभी व्यक्त नहीं किया
लेकिन जीवन भर एक छाया की तरह
सहायक प्रेम
तीसरा रंग – दादा-दादी का प्यार
कांपता हाथ,
लेकिन दिल को ठंडी नमी,
निस्वार्थ प्रेम।
चौथा रंग -शिक्षकों का प्यार
है,
लेकिन हमेशा।
शब्दों के बजाय मार्गदर्शन के माध्यम से
व्यक्त।
पांचवा रंग – परिवारऔर दोस्तों का प्यार
पैसे से खरीदने में असमर्थ
अगर समय बीत भी जाए तो भी कम नहीं होगा-
यही रिश्तों का प्यार है।
जीवन अर्थ देता है।
छठा रंग – हमारे बच्चो का प्यार
लड़का पूरे मन से प्यार करता है,
सोच-समझ कर,जिम्मेदारी से…
लड़की दिल से करती है,
भावनाओं, रिश्तों के माध्यम से…
प्यार सच मे दोनों का होता है,,
सिर्फ रास्ता अलग होता है
एक मन से,
एक दिल से…
सातवाँ रंग – जीवनसाथी का प्यार
खुद को भूलकर
एक-दूसरे की खुिशयों में मग्न रहने वाला,
दिल से दिया हुआ, शब्दों में न कह पाने वाला
लेकिन हर सांस मे
प्यार जो हमेशा महसूस किया जाता है।
प्राथना करता हूँ भगवान की जीवन मे हर किसी को प्रेम के सातों रंग मिले।
कवि: सुहास लहुरीकर
