रूह का खून
जनाजा जब उठा था मेरा ,
दिल क्यों ना थमा तेरा ,
क्यों रूह ना थमी तेरी ,
क्यों दिल ना चला मेरा ,
क्यों महसूस हुआ न तुझे ,
कि कतल हुआ है मेरा ,
जिस्म का नहीं ,तेरे हांथो पर रूह का खून है मेरा !
मगर तू फ़िक्र ना कर ,
तू फ़िक्र ना कर , बदला नहीं लूंगी मै ,
क्योंकि दर्द नहीं , ख़ुशी है मुझे ,
ख़ुशी है मुझे की मेरे अंत में तू मेरे पास था !
हाँ , कुछ ख्वाहिशें है ,कुछ ख्वाब है ,
तू आज भी चाह है मेरी ,
पर मै तेरी यादों में भी आबाद नहीं !
-Saanjh
