तुम किरणों का खिला हुआ फूल हो,
मैं खुशबू में मुग्ध प्रिये!
तुम हवा से बतियाता पेड़ हो,
मैं छाँव में बैठा मुसाफ़िर प्रिये!
तुम नदी का साफ पानी हो,
मैं तलाशता हुआ अपनी छवि प्रिये!
तुम तस्वीर खूबसूरत चाँद की,
मैं निहारता हुआ तारा प्रिये!
तुम हँसी किसी और की,
पर हर सांस में मेरी याद प्रिये!
_Mayuresh Mahadev Mudase