प्रेम का सातवाँ आसमान
प्रेम कोई शब्द नहीं,
जो किताबों में मिल जाए,
यह तो वह धड़कन है
जो बिना आवाज़ भी सुनाई दे जाए।
यह चाँद की ठंडी चाँदनी नहीं,
जो हर रात एक सी लगे,
यह तो सूरज की वह पहली किरण है
जो अंधेरे को छूकर रंग बदल दे।
प्रेम वह नहीं
जो तस्वीरों में मुस्कुराए,
यह वह आँसू है
जो चुपचाप पलकों से गिर जाए।
कभी यह माँ की उँगली पकड़
चलना सिखाता है,
कभी पिता की डाँट में छुपा
सपनों का घर बनाता है।
कभी यह दोस्त की हँसी बन
दर्द को हल्का कर देता है,
कभी बिछड़ने की चुप्पी में
दिल को मजबूत कर देता है।
प्रेम में अधिकार नहीं,
सिर्फ़ विश्वास की नींव होती है,
यह सौदे की भाषा नहीं जानता,
यह बस समर्पण की ही धुन होती है।
जब कोई दूर होकर भी
पास सा महसूस हो,
जब बिना कहे ही
हर बात का एहसास हो—
वही प्रेम है।
प्रेम वह साहस है
जो टूटकर भी जोड़ दे,
वह विश्वास है
जो गिरकर भी संभाल ले।
यह सातवाँ आसमान नहीं,
बल्कि वह ज़मीन है
जहाँ खड़े होकर
हम इंसान बनना सीखते हैं।
क्योंकि प्रेम सिर्फ़ पाने का नाम नहीं,
यह तो खुद को खोकर
किसी और में सच्चा होने का नाम है।