Pyar: Teri Meri Adhoori Dasta

एक अनजान अजनबी था ,हमारा यह रिश्ता !

ना हमें पता था ,ना तुम्हे एहसास था !

बस दूरियां ही थीं ,फिर न जाने कैसे शुरू हुआ !

यह प्यार का दास्ताँ ,सुना तो था !

ऐसे हर कोई दिल को नहीं भाता !

जैसे तुम भा गए थे ,तेरा मिलना मेरा नसीब था !

प्यार का आगाज था , हम तेरी दोस्ती से ही खुश थे !

तुमने मुझे अपने दिल में पनाह दिया था !

इस टूटे दिल को संभाला था तुमने ,

तेरे आने से एक बहार सा था ! 

जीवन में मुलाकात ना हुई थी हमारी कभी ,

तू मेरा ख्वाब था, या ख्याल ,

तू जवाब था या सवाल ?

जब बातें होती थी तुझसे मेरी ,

लगता था मेरे पास है तू ,

दूर इतना था फिर भी लगता था ,मेरा खास है तू !

इस दिल का एहसास है तू ,

जब हुआ था इजहार तुम्हारे प्यार का ,

हम भीगने लगे थे ,तेरे प्यार के सावन में ,

डूबने लगे थे तेरे ख्यालों में, मुस्कुराने लगे थे अकेले में,

तुम कहते थे, हम जैसा कोई ना मिला था तुम्हे ,

और हम कहते थे, तुम मिले हो तो सब कुछ मिल गया है हमे !

मन से चाहने लगे थे तुम्हें ,

जब बात ना होती थी तुझसे, आँखें ये रोती थीं चुपके ,

जब हम खफा हो जाते ,तुम मना लेते ,

तेरी उदासी को हम हंसा देते ,

फिर अचानक से ऐसा क्या हो गया था ?

जो तुम बदल गए ,बिना कुछ कहे हमें ,

छोड़ कर गए , वादा जो किया था तोड़ गए ,

यह सफ़र था अंजान से अपने पन का ,

हमसफ़र से जिंदगी भर का ,

तुम्हारे दिल से मेरे दिल का ,तुम्हे पाने से खोने का ,

हमारे प्यार को भूल जाने का ,

जिन जख्मों से हम उभर ही ना पाएथे ,

तुम उन्हें घाव देकर और गहरा कर गए !

इस दिल को रुला के, जिंदगी भर का गम दे गए !

चुन लिया तुमने दूसरा रास्ता ,

जोड़ दिया किसी और से दिल का रिश्ता ,

क़त्ल करके हमारे प्यार का ,

शुरू होने से पहले ही ख़त्म कर दिया ,

तेरे मेरे प्यार की अधूरी दास्ताँ !

                        -Radha

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